26 May 2011

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RAJAT JOSHI sagawara









आश्चर्य की बात है कि लोग जीवन को बढ़ाना चाहते हैं, सुधारना नहीं। -
आज ऐसे जियो जैसे यह अन्तिम दिन हो।
जीवन अपनी इच्छा अनुकूल चलना नहीं, ईश्वर की इच्छा के अनुकूल चलने में है।
कहीं ऐसा न हो कि जिन्दगी कि अच्छी चीज़ें, जिंदगी की सबसे अच्छी चीजों को ख़तम कर दें।
जब तक जीवन है, तब तक जीवन कला सीखते रहो।

जहाज समंदर के किनारे सर्वाधिक सुरक्षित रहता है। मगर क्या आप नहीं जानते कि उसे किनारे के लिए नहीं, बल्कि समंदर के बीच में जाने के लिए बनाया गया है ?

Life is a festival only to the wise.

Shortcuts may cut short your life. 





से सोना अग्नि में चमकता है, वैसे ही धैर्यवान आपदा में दमकता है।

संयम और परिश्रम मनुष्य के दो सर्वोत्तम चिकित्सक हैं।


जिसके पास धैर्य है उसे उसका फल अवश्य मिलता है। -





धीर गंभीर कभी उबाल नहीं खाते।
कबिरा धीरज के धरे, हाथी मन भर खाय।
टूक एक के कारने, स्वान घरै घर जाय॥ 
नीति निपुण निंदा करें या प्रशंसा करें, लक्ष्मी आए चाहे चली जाय, मृत्यु चाहे आज ही हो जाए, चाहे एक युग के बाद, परन्तु धीर पुरूष न्यायमार्ग से एक पग भी विचलित नहीं होते।
विकार हेतो सति विक्रियन्ते येषां न चेतांसि त एव धीराः ।
वास्तव में वे ही पुरूष धीर हैं जिनका मन विकार उत्पन्न करने वाली परिस्थिति में भी विकृत नहीं होता। - 
जिसे धीरज है और जो श्रम से नहीं घबराता है, सफलता उसकी दासी है।
धीरज सारे आनंदों और शक्तियों का मूल है।





मनुष्य ईश्वर की सर्वोत्कृष्ट रचना है।

वह मनुष्य बड़ा भाग्यवान है जिसकी कीर्ति उसकी सत्यता से अधिक प्रकाशमान नहीं है।
बड़े भाग्य मानुष तन पावा।
सुर दुर्लभ सद्ग्रंथन गावा॥
साधन धाम मोक्ष कर द्वारा।
पाय न जेहि परलोक संवारा॥


अपनी औकात कभी मत भूलो। 

उदारता मनुष्य का श्रेष्ठ गुन है।
आठ चक्रों और नौ द्वारों से युक्त हमारी यह देहपुरी एक अपराजेय देवनगरी है। इसमे एक हिरण्यमय कोष है, जो ज्योति और आनंद से परिपूर्ण है।

We are not creatures of circumstances, we are creators of circumstance.
 
 

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